छरिएका अन्तरङ्गह

Wednesday, February 6, 2013

मिस्कल हेास् या फेान, हानिराख है कालि
मेरै प्राण हेा कालु भनि ,ठानिराख है कालि

पग्लिएला मन कतै, बिबाहित जेाडि देख्ता
छरिएका अन्तरङ्गह, तानिराख है कालि

चलेकेा छ धड्कन केबल, तिम्रै मायाँले यहाँ
बन्द हेाला श्वाश भनि ,जानिराख है कालि

फर्कँदै छु नेपाल छिट्टै, बिहे गर्नलाइ तिमिसँग
रातेा सारि अनि चुरापेाते ,छानिराख है कालि


मिस्कल हेास् या फेान, हानिराख है कालि
मेरै प्राण हेा कालु भनि ,ठानिराख है कालि
  
 

No comments:

Post a Comment

 

Most Reading

Sidebar One